बस बहुत हुआ

बस बहुत हो गयाअब सहै नही जाता

जैसे सारी दुनिया पीछे पड़ी हो क्यों??????

 समझ नही आता 


हर मोड पर आसुरक्षित हु मै

किसे कहु केसे कहु कहने भी तो नही आता 
नई नई मुसीबते आचंक् सामने आ जाती है

 मेरी तो जैसे जाँ ही निकल जाती हैं

इतनी तंग गलियाँ नही होती

जितनी लोगो कि सोच हो गयी है

जैसे सब का जर्मीर , आत्मा सो गयी हैं!!!! 

 

Leave a Comment